Wednesday, 23 December 2020

हमारा गाँव

चारों ओर हरियाली है,

हे प्रभु यह तेरी महिमा निराली है।

खेतों मे सरसों के फुल खिल रहे हैं,

मानो आपस मे गले मिल रहे हैं।


कहीं रहड़, मुँग तो कहीं खेसारी है,

यहाँ के बच्चें बहुत आज्ञाकारी हैं।

यहाँ कोयल की मधुर आवाज़ सुनाई देती है,

यहाँ हर घर मे डलियाँ बनाई जाती है।


गाय के गोबर से आँँगन की लिपाई होती है,

उस आँगन में तुलसी की पूजा होती है।

वह आँगन स्वर्ग - सा बन जाता है,

उस आँगन मे देवी - देवता का वास हो जाता है।


इस पवित्र मिट्टी को तुम छोड़कर मत जाना,

जाना तो जाना लेकिन तुम लौटकर जरूर आना।

इस गाँव में बढ़े-बुजुर्ग रहते हैं,

ख़ुद से ज्यादा दुसरों के लिए जीते हैं।


इनके जैसा ना मिलेगा कोई और कहीं,

सुख और आनंद तुम्हें सब मिलेगा यहीं

चाहें जहाँ भी हम रहें,

अपने गाँव को याद करते रहें।


हमारा गाँव हमारी पहचान है,

जन्म लिये है जहांं वो मांं समान हैं।

जो अपने गाँव को भुला देता है।

मानो वो अपने माँ को रूला देता है।

 

Tuesday, 15 December 2020

आओ मिलकर हम बनाये, एक छोटा- सा संसार।

                       एक छोटा-सा संसार


                                                                                 

          Published

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिसमें प्रेम की खुशबू गमके,

जिसमें हो खुशियों की बहार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिसमें गाछ-वृक्ष काटी ना जाए,

ना हो कभी पशु-पक्षियों पर प्रहार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिसमें गंदगी की ना हो नामो-निशान,

जिसमें करें हम सफाई बार-बार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिसमें मिल सके सबको न्याय,

ना हो कभी यहाँ भ्रष्टाचार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


सुबह-सुबह उठकर ना खेले कोई पब्जी,

पो फटते ही सभी करें सूर्य नमस्कार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिसमें नारी घूम सके खुले आम,

ना हो कभी उनका बलात्कार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिसमें कोई खाली ना बैठे,

सबको मिले रोजगार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा- सा संसार।


जिसमें सभी की चाल-ढाल अच्छा हो,

हो उनका एक अच्छा व्यवहार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा- सा संसार।


जिसमें सभी को सब पसंद हो,

हो एक दुजे पर प्यार-दुलार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जहाँ कभी कोई काम ना हो उलटा-फुलटा,

सभी चले वहां नियम के अनुसार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जहांं हर कोई एक ही चीज़ मे व्यस्थ हो,

सभी करें अपने अन्दर की बुराई को उत्सार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जहाँ बच्चों को महत्व दिया जाये,

बने बच्चों के लिए एक अच्छा चटसार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जहाँ सबके दिलों में दया हो,

सभी प्रकृति से करें प्यार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जहाँ सब अपने आस-पास के चीजों का करें प्रयोग,

बढ़ते रहें अपने सफलता की ओर जैसा बढ़ता विजयसार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जहाँ किसी को खमंड या अभिमान न हो,

बड़े-से-बड़े सफलता पर भी किसी को ना हो अहंकार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जहाँ पवित्रता की हमेशा बात हो,

और शुद्ध हों सबके विचार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


अगर चुनाव की बात हो,

तो चुना जाए सही उम्मीदवार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


चाहे निर्धन हो या धनवान,

जो भी हमारे पास हो करें हम स्वीकार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जो वीर वतन के लिए हुए शहीद,

करें उनकी शव को श्रृंगार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


शिक्षा नीति में हो बदलाव,

और शिक्षा में सबसे आगे हो बिहार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिसमें हिंसावाद की बातें ना हो,

ना बंदूक, ना ही हो तलवार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिसमें हम उच्च शिक्षा प्राप्त करें,

और शिक्षा ही हो हमारा हथियार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


सच्चे दिल से कोई वस्तु बेची जाए,

ना हो कोई काला बाजार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिसमे सब सही राह पर चलें,

जिसमे हो ना कोई अपराध, ना हो कोई गुनहगार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिसमे कोई किसी की ना करें गुलामी,

सभी हो अपने हक के हक़दार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिसमें सबका हौसला बुलंद हो,

गिरकर भी कोई ना माने हार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिसमें बच्चों को सदाचार सिखाये जाए,

और सभी के अंदर हो एक अच्छा संस्कार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।



जिसमें सबको एक ही जैसा सम्मान मिले,

कोई ना करें जानवरों का शिकार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


किसी को भुखे पेट ही सोना पड़े,

इतना भी कोई ना हो लाचार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


भले बोले हम अलग-अलग भाषा,

पर एक ही हो परिवार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


भले हमारी जात-धर्म अलग-अलग हो,

लेकिन हमारे बीच कभी खड़े ना हो दीवार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


उसमे गरीबों को सम्मान मिलेगा,

नही लगेगी कभी राज दरबार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


इस सुन्दर - सी बगीचे मे,

खिलेंगे फुल अनेक प्रकार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


वहाँ हर एक का महत्व होगा,

कोई नही होगा बेकार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


वहाँ एकता को बल दिया जायेगा,

सब मिलकर मनाएंगे सबका त्योहार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


अब तो तुम छोड़ दो इस भ्रष्टाचार दुनिया को,

चलो अपना एक नया दुनिया बनाए मेरे यार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


सफलता की ओर बढ़ता चल,

रूकना मत, चलते रहो लगातार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


अगर तुम्हें अपने-आप पर विश्वास है,

तो हौसला रखना बरकरार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


वक्त नही लगेगा हमारे सपने,

अब जल्द हो जायेंगे साकार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


हमे किसी महबूब की यादों में,

खो नही जाना है, रहना है तैयार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


हमेशा सुकून और शांति,

यही रहे जीने का एक आधार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


कोई वहाँ मुर्ख नहीं होगा,

सब होंगे होशियार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


सबका दिल वहाँ साफ होगा,

होंगे हम बड़े दिलदार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


यह सुन्दर-सी संसार बनाने में,

तुम भी बनो हिस्सेदार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जो मिलेगा सो मिलेगा,

नही करेंगे हम इन्कार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


बच्चों को पढ़ा-लिखाकर,

बनाएंगे हम होनहार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


हम फुलों को तोड़ के क्यों दुख देते है?

अब नही बनाएंगे हम पुष्प हार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


कोई सुन्दर महबूब नही,

वातावरण से हो प्यार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


अगर आप सभी का साथ हो,

तो यह संघर्ष भी हो जायेगी पार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


अगर हम असफल होते है,

तो कोशिश करेंगे बार - बार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


जिंदगी दो पल की है,

बोल दो मिठ्ठे शब्द दो - चार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


अपने अंदर एक छोटा-सा संस्कार लायेंगे,

बड़े-बुजुर्गों को करेंगे हम नमस्कार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


निर्भया के गुनहगारों के साथ जो किया गया,

वही होगा सबके साथ, जो करेगा बलात्कार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।


ऐसा सुन्दर संसार को देखने के लिए,

अब हमारा दिल है बेकरार।

आओ मिलकर हम बनायें,

एक छोटा-सा संसार।







Sunday, 13 December 2020

नया साल - 2021 शायरी

 नई साल, नई शुरूआत होगी।

पुराने साल की यादगार रात होगी।

और कैसे प्रवेश करें हम नये साल में,

बस यही सब बात होगी।

पापा, आप ही हो सबसे महान।

क्यों मुझे बिठाये हो छाँव में?

जबकि छाले पड़े है आपके पाँव में

आपने इतना मुझे क्यों दिया है सुख?

कि झेलना पड़ा आपको दुख।


पापा, आपने हर मेरी ख्वाहिशों को पूरा किया।

अपनी ख्वाहिशों को आपने क्यों अधूरा किया?

अपने -आपको गिराकर, मुझे सिखाया जिंदगी का उड़ान,

पापा, आप ही हो सबसे महान।


आपने ऊँगली पकड़कर चलाना सिखाया है,

अपने ही तो मुझे सही राह दिखाया है ।

मैं प्रयत्न करूँगा कि दे सकुँ जीवन भर सम्मान,

पापा, आप ही हो सबसे महान।


पापा, से ही मेरा जीवन पूरा होता है,

पापा ना हो तो परिवार अधूरा होता है।

पापा आप है तो समाज मे मेरा भी होता है सम्मान,

पापा, तुम ही हो सबसे महान।

Thursday, 10 December 2020

असली जीत का मजा

जब जीत आसानी से मिल जाए,

तो जितने की अहसास नहीं होता है।

हमें जितना भी है, लेकिन कठिनाइयों से गुजर के,

वरना वह जीत कुछ खाश नहीं होता है।

      

                                - कवि निरज यादव

Submitted in anthology (BEJUBAN ISHQ)


Monday, 2 November 2020

Motivational शायरी

सफलता की राह पर,

सब कोई गिरता है।

चले जो तुरंत उठकर,

अंत मे वही जितता है।

                                 - कवि निरज यादव


(Published in Amar Ujala)

Submitted for anthology

Thursday, 29 October 2020

शायरी✍️✍️✍️🙏🙏 माता - पिता

जिसनें हमें जीवन दिया,

पूरी जिंदगी हमारे लिए चिंतन किया।

आखिर उन्हें हम क्यों भूला रहें है ?

जबकि भगवान हमारे पास ही है, तो किसको हम बूला रहे हैं?


                                       - कवि निरज यादव

Submitted for anthology


मेरा परिचय
मैं 10वीं कक्षा का छात्र हुँ। मेरा जन्म बिहार के मोतिहारी जिले के नयकाटोला गाँव मे हुआ हैं।
मेरे द्वारा रचित पुस्तक को जरूर पढ़े......



शायरी✍️✍️✍️✍️

 ये देश - देश की बात है।

भरी रोशनी मे भी रात है।

बिटियाँँ यहाँ नहीं  है सुरक्षित,
चारों तरफ की यही हालात है।

                     - निरज यादव

Submitted for anthology ( BEJUBAN ISHQ)

मेरा परिचय
मैं 10वीं कक्षा का छात्र हुँ। मेरा जन्म बिहार के मोतिहारी जिला के नयकाटोला गाँव मे हुआ हैं।
मेरे द्वारा रचित पुस्तक को जरूर पढ़े......



 

शायरी✍️✍️✍️

जो आमने - सामने से जवाब दें, ऐसा जुबान चाहिए।

जो 24 घण्टें सिमा पर डटे रहें, ऐसा जवान चाहिए।

करें ना कभी जो आपस मे लड़ाई, 

सबके बीच एकता हो, वैसा हिन्दूस्तान चाहिए।

Sunday, 25 October 2020

माँ से ही दुनियाँ महान होती है।




माँ बच्चों की प्राण होती है।
माँ ही हमारी ज्ञान की ज्योती है।
माँ ही है सबसे सर्वश्रेष्ठ,
माँ से ही दुनियाँ महान होती है।


माँ बिना पूरा जहान रोती है।
माँ को छोड़कर मंदिरों मे क्यो पूजा-पाठ होती? 
माँ कोई देवियों से कम नहीं,
तो माँ हमेशा क्यों अपमान होती है? 


माँ से ही निशा और बिहान होती है।
माँ से ही हमारी जिंदगी मे उड़ान होती है।
माँ सब कुछ है हमारे लिए,
माँ से ही दुनियाँ महान होती है।


माँ से ही हमारी पहचान होती है।
हमारी सफलता मे माँ की योगदान होती हैं।
माँ से ही तो हम सब कुछ सिखते हैं, 
माँ से ही दुनियाँ महान होती है।



हिन्दी से प्यार किजिये

हमे गर्व है कि हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है। और आज हिन्दी भाषा की प्रयोग कई देशों - विदेशों मे की जा रही हैं।
लेकिन हमें यह जानकर अफसोस होती हैं कि हमारे भारत के कई शहरों के लोगों को हिन्दी भाषा बोलने मे कठिनाई होती है।

पर इस बात की उतनी अफसोस नही कि उन्हें हिन्दी बोलने नहीं आती। 
अफसोस तो इस बात की है कि वे कभी हिन्दी सिखना ही नही चाहते।
उन्हे तो अंग्रेजी या अन्य भषाओं मे दिलचस्वी होती है।
मेरे लिए सब भाषा एक सम्मान है लेकिन हमें कभी भी अपनी पहचान नही भुलानी चाहिए।
हिन्दी ही हमारी पहचान है।

हिन्दी से प्यार कीजिए

हमारे राष्ट्र भाषा को अधिकार दीजिए।
मिठी स्वर में बोलकर हिन्दी को सवाँर दीजिए।
जितना प्यार करते हो भारत माता से,
उतना ही हिन्दी से प्यार कीजिए।

जल्दबाज़ी ना करें, कुछ इंतिज़ार कीजिए।
एक बार में ना हो तो बार-बार कीजिए।
कम-से-कम आज तो अंग्रेजी छोड़कर,
हिन्दी से प्यार कीजिए।

अपने हिन्दी की बोल सुधार कीजिए।
हिन्दी को अपने दिल मे उतार लीजिए।
जब दिल में हिन्दी बस जाये तो फिर,
हिन्दी से प्यार कीजिए।

हिन्दी पढ़े-लिखों से अच्छा व्यवहार कीजिए।
हिन्दी सिखाकर अपने बच्चों को अच्छा संस्कार दीजिए।
जितना प्यार करते हो अपने तिरंगे से,
उतना ही हिन्दी से प्यार कीजिए।

पढ़-लिखकर भारत में ही कारोबार कीजिए।
अपने ज्ञान से भारत में ही कुछ तैयार कीजिए।
जितना प्यार करते हो उस भारत के सैनिकों से,
उतना ही हिन्दी से प्यार कीजिए।

निवेदन है एक बार दिल से विचार कीजिए।
हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है उसको स्वीकार कीजिए।
तब जाकर अपने होश -हवास में ,
हिन्दी से प्यार कीजिए।

Wednesday, 21 October 2020

शायरी

लगेगा ऐसा कि हो रहा चारों तरफ चमत्कार।

पुरे बिहार मे जलेंगी ललटेन, मिट जायेगा अन्धकार।

कि अब कोई काम मे और नही होगी देर,

क्योंकि आ रहा है, तेज रफ्तार - तेजस्वी सरकार।


                                           - कवि निरज यादव


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Sunday, 18 October 2020

हमारे शिक्षक

पूरे साल भर मेहनत करते,

मन लगाकर पढ़ाते हमे।

जो ना समझ में आये हमको,

दोबारा समझाते हमे।


परीक्षा में अच्छा परिणाम आये,

इसके लिए जी - जान वो लगा देते हैं।

चाहे जितना भी मूर्ख हों हम ,

अपने परिश्नम से सफल बना देते हैं।


जब ग़लत राह पर चलते हम,

सही राह वो बताते हैं।

जो आँँधी में भी जलकर रोशनी फैलाये,

वैसा दीप बनाते हमे।


समाज के जाति - धर्म का भेद - भाव,

मिटाने को सिखाते हमे।

सभी धर्मों का आदर सम्मान,

करने को सिखाते हमे।


हमारे महान शिक्षकों को,

मेरा कर जोड़कर प्रणाम है।

मेरी यह छोटी - सी रचना,

उनके लिए एक सम्मान है।

(Submitted to HTW)

वही सबसे बड़ा महान है

माँ हमारी भगवान है।

माँ ही हमारी बाइबिल, गीता और कुरान है।

जो सच्ची  सेवा करे उनकी,

वही सबसे बड़ा महान है।


माँ ही हमारी पहली भूगोल, गणित और विज्ञान है।

हम तारे बनकर चमकते हैं जिनमें, माँ वो आसमान है।

जो माँ की चरण हमेशा स्पर्श करे,

वही सबसे बड़ा महान है।


माँ हमारी छोटी-सी दिल मे पूरा जहान है।

माँ ही हमारी निशा और बिहान है।

जो माँ को अपने दिल मे बसा ले,

वही सबसे बड़ा महान है।


माँ ही तो हमारे लिए, क़ीमती वरदान है।

माँ की सेवा करना यही तो सबसे बड़ा ज्ञान है।

जो माँ को हमेशा खुश रखे,

वही सबसे बड़ा महान है।


(Submitted to HTW)

शायरी

 यूँ तो करते हो कईयों से प्यार।

अपने देश से भी प्रेम करो मेरे यार।

भले जाते हो शहर, तुम जाओं,

लेकिन भुल मत जाना अपने घर - द्वार।

                                                   - निरज यादव

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Friday, 9 October 2020

नागालैण्ड

चारों  तरफ  पहाड़ है , गिरता  झरने  से पानी,

कहीं और की नही, ये है नागालैण्ड की कहानी।

यहाँ तुमको मिलेगा प्रकृति की सुन्दरता भरपूर,

एक बार देखने आना नागालैण्ड तुम जरूर।

         
                              -- कवि निरज यादव

Submitted for anthology


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Nitu Kumari


                          सीख


किसी गाँव मे एक  हरि नाम का किसान रहता था। हरि के तीन पुत्र थे -- जगदराम, परमजीत और मगन । जगदराम अपने पिता के साथ खेती - बारी करता था। और परमजीत टोपी बेचने का व्यापार करता था। तथा मगन बहुत कामचोर था। वह दिनभर दोस्तों के साथ घुमते रहता । 

        हरि एक दिन जगदराम को कहता है  - “ जगद, मगन को अपने साथ लेकर खेत मे आना”। जगदराम बोला - “ठीक है बाबू जी”।

         थोड़ी देर बाद जगदराम, मगन को खेत मे लेकर आता है। दोनो भाई और उनके पिता मिलकर काम कर रहे थे। कुछ घण्टे बाद  मगन अपने पिता से कहता है - “ बाबू जी, मैं बहुत थक गया हूँ। क्या मैं थोड़ी देर के लिए आराम कर लूँ।”
हरि ने जवाब देते हुए कहा - “जाओ उस पेड़ के नीचे थोड़ी देर आराम कर लो”। 

          लेकिन मगन वहाँ सुखभरी नींद लेने लगता है। जगदराम और उसके पिता हरि पुरा काम खत्म करके आते है तो उन्होंने देखा कि मगन अभी तक सोया हुआ था। मगन को जगाकर कहते हैं , “घर चलो, काम खत्म हो गया।”

          हरि,  मगन को लेकर बहुत चिंतित रहता था। वह हमेशा सोचता कि उसके  गुज़र जाने पर मगन का क्या होगा।
हरि और उसके दोनों बेटे तथा दोनों बहूयें एक दिन आपस में बात -चीत करते हैं। मगन को कल सुबह हमलोग मिलकर समझायेंगे।

           अगले दिन मगन को सभी परिवार वाले समझाते हैं कि तुम कोई काम करो, वरना आगे चलकर तुम्हें कष्ट झेलना पड़ सकता है। फिर भी मगन पर कोई असर ना पड़ा। मगन जैसा - का -तैसा ही रह जाता है। मगन की कामचोरी दिन -प्रति-दिन बढ़ती ही  चली गई। 

           एक दिन हरि बहुत बीमार पड़  जाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है। हरि मरते वक्त भी अपने बेटे मगन को बहुत समझा रहे थे। 

           जैसे -जैसे समय बितता गया। मगन के भाईयों ने उसे कहा - “तुम खेती में हाथ बटाओ या फिर अपने बड़े भाई परमजीत के साथ टोपी बेचने का व्यापार करो। नहीं तो अपना कोई कारोबार शुरू कर लो।”

अगर ऐसे ही बैठे रहोगे तो हम तुम्हें अपने साथ नहीं रख सकते”।  
             यह सब सुनकर मगन को गुस्सा आया और वह उसी दिन घर छोड़कर चला गया। जब दूसरे शहर में पहुंचा तब तक मगन को भूख -प्यास से बुरा हाल हो गया था। 

             तब वह पास के होटल में जाता है और उसके मालिक को कहता है, “मुझे बहुत भूख लगी है, क्या मुझे कुछ खाने को मिलेगा?”
होटल के मालिक जबाब देते हुए कहां, यहाँ किसी को खाना मुफ़्त में नहीं दिया जाता है। अगर तुम चाहो तो कुछ दिनों तक बर्तन धोने का काम कर सकते हो क्योंकि रामू अभी गाँव गया है। और तुम्हें खाना भी मिलेगा।”

             मगन ने थोड़ी -सी भी देरी नहीं की और काम को स्वीकार कर लिया। किसी ने ठीक ही कहा है, ‛मरता क्या न करता ’। कई दिनों तक मगन यही काम करता रहा। एक दिन मगन को तेज बुखार हो गया। उस दिन वह काम नहीं कर सका इसलिए उसके मालिक ने उसको कुछ खाने को नहीं दिया। 

              तब जाकर मगन अगले दिन ही अपने घर की ओर चल पड़ता है। उसने जो किया था उसके लिए वह बहुत शर्मिंदा था।
घर पहुँचकर अपने भाइयों से माफ़ी माँगता है और पूरी लगन और मेहनत के साथ अपना काम करने लगता है। 

               उसके जीवन मे काफ़ी बदलाव आया। अब तब तो वह समझ गया था कि हमे अपने परिवार को कभी नहीं ठुकराना चाहिए।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

लेखिका - नितु कुमारी
परिचय: 
नितु कुमारी का जन्म बिहार के मोतिहारी जिले के नयकाटोला गाँव मे हुई है। उसके पिता का नाम श्री दीनानाथ यादव है और माता का नाम श्रीमती चिंता देवी है। वह कवि निरज यादव जी के बहन है।








नितु कुमारी का जन्म बिहार राज्य के पूर्वी चम्पारण जिले के भोपतपुर नयकाटोला गाँव में हुआ है। उनकी पिता का नाम श्री दीनानाथ प्रसाद यादव और माता का नाम श्रीमती चिंता देवी है। उनकी पिता एक किसान है और उनकी माता गृहिणी है। उनकी दो भाई है - निरज यादव और बब्लु यादव। उनकी एक छोटी बहन भी है जिनका नाम नेहा कुमारी है। इन्होंने अपने बड़े भाई से प्रेरित होकर कहानी लिखना शुरू किया है। 
इनकी प्रथम कहानी “हमारी कलम-हमारी ताकत” साझा-संगह में प्रकाशित हुई है। 



Thursday, 1 October 2020

जय बापू - जय बापू - जय बापू हमारे

 जय बापू , जय बापू , जय बापू हमारे (2)

देश  को आजा़द किये और हमारे जिंदगी को सँवारे (2)

💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥

भारत मे ही आते बापू , आपने अंग्रेजी भेष उतारी (2)

धोती को अपनाया आपने , चम्पारण सत्याग्रह के लिए गए मोतिहारी (2)

जय बापू , जय बापू , जय बापू हमारे ।

देश  को आजा़द किये और हमारे जिंदगी को सँवारे ।

💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥

समुंदर मे डुबते नाव को किये आपने किनारे (2)

तुम ही हो दुलारे - प्यारे , राष्ट्र - पिता हमारे (2)

जय बापू , जय बापू , जय बापू हमारे ।

देश  को आजा़द किये और हमारे जिंदगी को सँवारे ।

💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥

भारत को आज़ाद करके , अंग्रेजो को भगाया (2)

पुरी देश और दुनियाँ मे , आपने भारत का मान बढ़ाया (2)

जय बापू , जय बापू , जय बापू हमारे ।

देश  को आजा़द किये और हमारे जिंदगी को सँवारे ।

💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥

आपने ऐसा काम किया कि , पैसो पर तस्वीर छ्पे तुम्हारे (2)

आपने ऐसा आंदोलन किया कि , हम जिते और अंग्रेज हारे (2)

जय बापू , जय बापू , जय बापू हमारे ।

देश  को आजा़द किये और हमारे जिंदगी को सँवारे ।

💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥

जय बापू , जय बापू , जय बापू हमारे (2)

देश  को आजा़द किये और हमारे जिंदगी को सँवारे (2)

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

                                             कवि निरज यादव

यह कविता गाँधी जी के सम्मान मे लिखी गई है। अगर आपको अच्छी लगे तो कॉमेंट करें।

“कविताएँँ  कोरोना काल की" पुस्तक के लेखक


Saturday, 26 September 2020

बिहार की चुनाव

 पुरे पाँच साल भर नेता जी,

 अपना  मुँह दिखलाते नहीं।

 किये हुए वादे कभी भी,

 चाह कर भी निभाते नहीं।


 चुनाव के वक्त पर नेता जी,

 वोट माँगने आ जाते है।

 गरीबों को गले लगाकर,

 अपनी बातों में बहलाते है।


 गाँव - गाँव मे घुमकर नेता जी,

 बड़े - बड़े वादे कर देते है।

 भोली - भाली जनता को बहलाकर,

 उनसे वोट ले लेते है।


 जब वे जीत जाते है,

 आश लगयी बैठी जनता।

 खुशी के गीत गाते है।

 तब बुरी व्यवहार करते उनकी प्रवक्ता।


 इसीलिए सोच - समझकर,

 वोट हमे देनी चाहिए।

 जो हमारे सपनों की करें कदर।

 उनको ही चुनाव मे जितानी चाहिए ।

                                                 -- निरज यादव

Published in Anthology

                     

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यह कविता 2020  मे बिहार में हो रही चुनाव के उपर लिखी है।मै चाहता हुँ कि बिहार की जनता एक अच्छे नेता को मुख्यमंत्री बनाये। अगर आपको यह कविता अच्छी लगी हो तो सभी को शेयर जरूर करें। 

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मेरा परिचय:

मै बिहार के मोतिहारी जिले के नयकाटोला गाँव से हुँ। मै एक पुस्तक का लेखक भी हो चुका हुँ। 

मेरा पुस्तक का नाम है “कविताएँ कोरोना काल की" इस पुस्तक को आप जरूर पढ़े। यह Amazon पर उपलब्ध हैं। और Reviews देना मत भुलियेगा।


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Thursday, 24 September 2020

My thought-2


📜📜📜📜📜📜📜📜      भगवान हमेशा ही हमारे साथ रहते है, 

बल्कि हमे अपना साथ कभी नहीं छोड़नी चाहिएं।

                       🖋️निरज यादव

📜📜📜📜📜📜📜📜


मेरी अन्य भी कविताएँ पढ़े......

  • समय
  • लॉकडाउन मे गाँँव हमें बुला रही 
  • My thought in english.

मेरे द्वारा रचित पुस्तक को जरूर पढ़े...

“कविताएँ कोरोना काल की”

Wednesday, 23 September 2020

My thought

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Proudness is must but over proud will always bring to the ground

                                                 -- Niraj Yadav

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Saturday, 19 September 2020

समय

             समय का सम्मान करो,
             वरना दु:ख भरी गीत गाते रहोगे।
             समय से पहले अपना काम करो,
             वरना तुम पछताते रहोगे।

             समय केवल घड़ी को ही नहीं चलाता,
             बल्कि हमको भी चलाता है।
             टिक-टिक का आवाज़ करके वो शोर नहीं मचाता,
             बल्कि हमे सतर्क कराता है

 
              घड़ी तो अपने आप ख़राब हो जाते हैं।
              लेकिन समय को हम ख़राब कर देते है।
              घड़ी को तो हम सुधार देते है।
              लेकिन समय को सुधार नहीं पाते हैं।
                                        
                                               ---   निरज यादव



मेरे द्वारा रचित पुस्तक को जरूर पढ़े
“कविताएँ कोरोना काल की”

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गमछा

इस गमछे की एहमियत हमें बचाये रखना है। दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न रहे? गमछा सदा लगाये रखना है।