Sunday, 29 August 2021
Lord krishana
Teachers Day poem 2021
You Taught Me by Author Niraj Yadav
You taught me the natures beauty,
You made me realize my own duty.
You made me a responsible person,
You've treated me as your own son.
You taught me to work hard,
Your taught me to believe in God.
You have blessed me with your knowledge,
You have appreciated me to encourage.
You have shaped and moulded me,
When I misbehaved, you've scolded me.
You taught me my own rights.
In this way, you made my future bright.
Saturday, 28 August 2021
Teachers Day, English poem
The way they teach us,
Their teachings easily reach us.
They teach with love and care ,
With others, our relation cannot be compared.
When we do mistakes, they correct us,
In every path of our life, they direct us.
They want us to be a good person,
They update us for a new version.
When we're upset, they motivate us,
They seat nearby and communicate with us.
They dig out our interest,
For our bright future, they try their best.
Saturday, 21 August 2021
#rakshabandhan
Monday, 16 August 2021
My quote
जैसे गीत को लिखने के लिए,
एक धुन की जरूरत होती है.
वैसे ही जीवन में कुछ करने के लिए,
एक जुनून की जरूरत होती है.
Friday, 13 August 2021
Independence Day - 2021
My quote on village
आज कल के युवाओं का तो टाउन और शहर में रहने का दौर है.
लेकिन अपने गाँव में तो जाने का तो मज़ा ही कुछ और है
Father's day quote
हमारे रिश्ते को कोई तोड़े
ये कोई पतंग की डोर नहीं है
और चाहें मैं कितना भी बड़ा हो जाऊ,
मेरे पापा के कंधे इतने कमज़ोर नहीं है
Shayeri
अपने ज़िन्दगी का दर्द मैं सहता हूँ
कुछ तुम्हें कहता हूँ - कुछ उन्हें कहता हूँ
आख़िर कभी तो किस्मत पलटी,
इसी आस में रहता हूँ
My quote
मेरी ज़िंदगी कुछ ऐसी है दोस्तों,
मैं मुस्कुराता हूँ अपनी दु:खों को छिपाने के लिए
और ये पल यूँ ही काटते जाता हूँ,
अपने मंजिल को पाने के लिए
Saturday, 12 June 2021
My quote
जी जान लगा के पढ़ाते हैं।
मेहनत करना सीखाते हैं।
आनंद सर और ख़ान सर जैसे शिक्षक ही,
बिहार को आगे बढ़ते हैं।
Tuesday, 8 June 2021
Nitu Kumari's Kahani
रिक्शा वाला बंदर
एक गाँव में एक मोहन नाम का एक लड़का अपनी विधवा माँ के साथ रहता था। मोहन 5 वर्ष का था। उसकी माँ कपड़ा👗👚👖 कढ़ाई करती थी। वह दिन भर काम करती थी तब जाकर मुश्किल से 300 रू. कमा पाती थी। और इससे उनकी पालन-पोषण भी ठीक से नहीं चल पाता था।
एक दिन की बात है, गाँव से 4 कोस दूर, मेला लगता है जिसमें Circus और चिड़ियाँ घर तथा बड़ा झुला आता है। जिसे देखने के लिए गाँव के सभी बच्चे अपने माता-पिता के साथ मेला घुमने जा रहे होते है। तब मोहन ने देखा कि उसका दोस्त समीर भी मेला जा रहा था। मोहन, समीर से पूछता है कि, “अरे! दोस्त, कहाँ जा रहे हो। तब समीर बोला, “अरे मोहन! तुम्हें पता नहीं है कि मेला लगा है। और उसमें अनेक प्रकार के चीजें आई है और हम लोग उसे देखने जा रहे हैं।
इतना कहते हुए समीर अपने माता-पिता के साथ चला 🚶👣👣 जाता है। तब मोहन खुशी से दौड़ते हुए अपनी माँ के पास आता है और अपनी माँ से कहता है कि- “माँ, आज मेला चलो ना, गाँव के सभी लोग मेला जा रहे हैं”। तब माँ कहती है, “नहीं, हम नहीं चल सकते”
मोहन- “ पर क्यों? ”
मोहन की माँ,- “क्योंकि अगर हम चले जायेंगे तो आज की कमाई नहीं हो पायेगी। अगर कमाई नहीं हुई तो हम कहाँ से खायेंगे?”
मोहन अपनी माँ से जिद्द करने लगता है। मोहन कहता है, “माँ, पैसे दे दीजिए, मैं गाँव वालों के साथ चला जाउंगा। ”
माँ डर रही थी मगर मोहन के जिद्द के आगे विवश हो जाती है और जाने के लिए आज्ञा देती है। मोहन मेला जाने की बात सुनकर बहुत खुश होता है और जाने की तैयारी करने लगता है। जब आधे रास्ता में पहुंचता है तब वह थक जाता है और देखता है कि जब बच्चे थक जा रहे हैं तो उनकी माँ उसे गोद में उठा ले रही है।
मोहन निराश होकर बैठ रहा होता है तब एक बंदर🐒 मोहन के सामने आता है और कहता है कि- “मुझे बहुत जोर से भूख लगी है। क्या मुझे तुम कुछ खाने को दे सकते हो?”
मोहन कहता है कि-“ठीक है, मैं तुम्हें खिला दूंगा लेकिन तुमको मुझे मेला तक पहुंचाना पड़ेगा।
बंदर भी मोहन की बातों से सहमत हो जाता है और दोनों मेले की ओर चल पड़ते हैं। उन दोनों में मित्रता बड़ती चली जाती है। दोनों मेला पहुंच कर ख़ूब मस्ती करते हैं। रंग-बिरंगी मिठाइयां खाते है और झूले पर झूलते हैं।
शाम होते ही दोनों घर की ओर लौटने लगते हैं। बात-चीत करने के दौरान मोहन को मालूम होता है कि उस बंदर का और कोई नहीं है। वह अकेला है। तब मोहन उस बंदर को भी अपने घर 🏡 लाता है।
मोहन जब घर पहुंचता है तो उसकी माँ दौड़ती हुई आती है और मोहन को गले लगाती है। फिर मोहन से उस बंदर के बारे में पूछने लगती है तब जो कुछ भी हुआ था, मोहन विस्तार से अपनी माँ को बता देता है। सारी बात सुनकर, माँ, बंदर को खाना खिलाती है।
जब सात-आठ दिन बीतता है तो बंदर से घर की स्थिति देखी नहीं जाती इसलिए उसने कमाने की ठानता है। और माँ से जाकर कहता है कि - “अगर कोई रिक्शा हो तो मैं कल से कमाना चाहता हूं।”
पहले तो माँ मना कर देती है कि तुमसे नहीं हो पाएगा। लेकिन बंदर जिद्द करने लगता है तो माँ उसे एक रिक्शा दिला देती है।
उसके अगले दिन से ही वो बंदर कमाना शुरू कर देता है और रोज़ दो-तीन सौ रूपये लाकर माँ को देता है तो माँ बहुत खुश होती है। तब बंदर माँ से मोहन को पढ़ाने की बात करता है। यह बात सुनकर मोहन और उसकी माँ, दोनों खुशी से गद-गद हो जाते हैं। तो माँ कहती है, “ठीक है। कल से मोहन को स्कूल भेज देंगे।
बंदर रोज़ मोहन को उसके स्कूल तक छोड़ देता और शाम होते ही बुलाने जाता। इसी प्रकार बंदर, मोहन और उसकी माँ से घुल-मिल जाता है और खुशहाली से अपने जीवन बिताने लगता है।
Thursday, 3 June 2021
Environment Day, 2021
कि सुख गया बगीचा पूरा, दिख नहीं रहा हरियाली रे...
ये क्या किया तुमने?... बताओ मेरे माली रे...
कि सुख गया बगीचा पूरा, दिख नहीं रहा हरियाली रे...
ये क्या किया तुमने?... बताओ मेरे माली रे...
मैंने तो तुमको पेड़ दिया, ताकि तुम इसका फल खाओ,
इसकी रक्षा करो और भी पेड़ लगाओ।
पर तुमने इन सबको कर दिया खाली रे...
ये क्या किया तुमने?... बताओ मेरे माली रे...
रंग-बिरंगे फूल दिए ताकि तुम इसको सजाओ,
अपने घर के आस-पास लगाओ और सुन्दर बनाओ।
कि अब दिख नही रहा फूलों की ङाली रे...
ये क्या किया तुमने?... बताओ मेरे माली रे...
तुमने पशु-पक्षियों का घर उजाड़ा,
और एक-एक को तुमने गिन-गिन कर मारा।
अब तो अपनी गलतियों को सुधारो हाली-हाली रे...
ये क्या किया तुमने?... बताओ मेरे माली रे...
कि सुख गया बगीचा पूरा, दिख नहीं रहा हरियाली रे...
ये क्या किया तुमने?... बताओ मेरे माली रे...
कि सुख गया बगीचा पूरा, दिख नहीं रहा हरियाली रे...
ये क्या किया तुमने?... बताओ मेरे माली रे..
Friday, 28 May 2021
My Quote
उन्नति की ओर पड़ा हमारा क़दम।
शहर में आकर शहरी बन गए हम।
अपने गाँव को ही शहर बना दें,
इतना किसी में नहीं था दम।
***************
क़दम= पैर, पदचिन्ह।
और
कदम= कदंब का पेड़
****************
सपने हम हज़ारों देखते हैं,
और सभी सपनों को साकार करते हैं पिता।
जब हम खुश होते हैं,
तो हमसे भी ज़्यादा मुस्कुराते हैं
पिता।
-Author Niraj Yadav
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सारा जीवन आपने खेतों में हल चलाया।
खून और पसीना बहा के,
आपने मेरा कल बनाया।
🙏🙏🙏🙏🙏
ना जात, ना धर्म देखता हूं।
मैं कवि हूं, सिर्फ कर्म देखता हूं।
Wednesday, 26 May 2021
Back cover of book
हम जानते हैं कि चाहें हम जितना भी कोशिश कर लें मगर माँ का कर्ज कभी भी नहीं चुका सकते। लेकिन हम इतनी कोशिश जरूर कर सकते है जिससे हमारी माँ के चेहरे पर मुस्कान आ जाए।
और यह साझा-संग्रह (प्यारी माँ) एक हमारी छोटी-सी कोशिश है अपने माँ को खुश करने की और उसके चेहरे पर मुस्कान लाने की।
इस साझा-संग्रह में कुल 31 सह - लेखकों एवं लेखिकाओं ने मिलकर अपने शब्दों और विचारों से माँ के उपर रचनाएं रचि हैं। और इस पुस्तक को निरज यादव ने संकल किया है। और पियंका महंत जी ने शुद्धिकरण किया है. इस पुस्तक में हर रचना माँ के विषय पर ही है। और आपको यह पुस्तक पढ़ने में इतना आनंद आएगा वो हम बता नहीं सकते।
तो देर किस बात की? आज ही औडर करें और इस पुस्तक को अपने घर मंगाए।
Sunday, 23 May 2021
अमर हो जाते है.....
ये चाँद वही, सूरज वही,
बदल तो हम जाते हैं।
ये धरती वही, आकाश वही,
इसको छोड़ जाते हैं।
हमारा यहां से जाना है निश्चित,
तो आख़िर क्यों हम घबड़ाते हैं?
पहले तो हम करते हैं ग़लती,
फिर बाद में पछताते हैं।
जिन्होंने जीना सीख लिया,
वो मर के भी जगमगाते हैं।
भले लोग उसके शव को जला दें,
लेकिन वो लोगों के दिलों में बस जाते हैं।
लोग उसके गुण को गाएं,
ऐसा कुछ कर जाते हैं।
मर कर भी इस दुनिया में,
अमर हो जाते हैं.....
अमर हो जाते हैं.....
Published in Khwabo ka Pulinda anthology book
Tuesday, 18 May 2021
My song -2
एकरा चपेट में आईल पूरा संसार
अब मान लेकक सब केहू एकरा से हार
की एकरा से अब सब केहू भईल मजबूर...2
कऊवा उड़ - खरहा उड़, कोरोना भईल मशहूर.....2
निकलता S ता जे बहरी, पुलिस से पिटाई
चोट जब लागी तब याद आई माई
की पुलिस डंडा लेके भागे,
ऊ पिछे हम आगे....2
ओकनी का कहे कि मास्क लगाना अब जरूर.....2
कऊवा उड़ - गदहा उड़, कोरोना भईल मशहूर....2
नीरज करें जागरूक, कोरोना पर लिख के हो
बीतावत तारें लॉकडाउन , कुछो - ना - कुछो सिख के हो
निकलल S Vaccine,
तबो बड़े दिन - प - दिन
की हमनी का बानी अपना गऊवा से बहुत दूर
कऊवा उड़ - कुकुड़ उड़, कोरोना भईल मशहूर....2
की एकरा से अब सब केहू भईल मजबूर...2
कऊवा उड़ - खरहा उड़, कोरोना भईल मशहूर.....2
Monday, 17 May 2021
लॉकडाउन में गाँव हमे बुला रही है
लॉकडाउन में गाँव हमे बुला रही है
दिन-रात भूखे पेट सो रहे हैं,
अपनी लाचारता पर हम ख़ुद रो रहे हैं।
कोरोना की क़हर हमें रूला रही है,
लॉकडाउन में गाँव हमें बुला रही हैं।
जिस गाँँव को छोड़कर हम भागे थे,
बिना सोये पूरी रात हम जागे थे।
आज शहर हमें भगा रही है,
लॉकडाउन मे गाँव हमें बुला रही है।
अपनी खुशी के लिए उस गाँव से नाता हमने तोड़े थे,
गाँव से आकर एक-एक ईट हमने जोड़े थे।
अच्छे मकान में भी कोरोना हमें पकड़ रही है,
लॉकडाउन में गाँव हमें बुला रही है।
मुसीबत में कोई नहीं है हमारे साथ,
बीत रही है जिंदगी अकेले दिन-रात।
कोरोना हमे अपनी चपेट मे जकड़ रही है,
लॉकडाउन मे गाँव हमें बुला रही है।
- Author Niraj Yadav (Bhopatpur Nayakatola, Motihari : Bihar)
Mail id : ny5726029@gmail.com
Saturday, 15 May 2021
My song
Saturday, 8 May 2021
माँ by Author Niraj Yadav
माँ, अगर तेरी डांंट ना पड़ी होती मुझे,
तो शायद आज मैं ज़िंदगी के लिए तैयार नहीं होता।
माँ, अगर ये लॉकडाउन ना लगी होती,
तो मैं कब का आ गया होता, अब और इंतज़ार नहीं होता।
माँ अगर तेरी दुआ ना होती मुझ पर,
तो शायद आज मेरे सपने साकार नहीं होते।
भले मेरे चेहरे मुस्कुराते हो,
लेकिन मेरा दिल थक गया है रोते-रोते।
दो साल होने को है, तुझसे मिला नहीं,
तुझसे दूर रहकर अब एक और दिन भी पार नहीं होता।
माँ, अगर ये लॉकडाउन ना लगी होती,
तो आज ही चला आता, अब और इंतज़ार नहीं होता।
Friday, 7 May 2021
How can we say, we are civilized beings?
Every hour we feel proud.
Yet, most spit on the ground.
Ignorance of how the changes we can bring,
How can we say, we are civilized beings?
Now and then, we chop down trees.
Before we learn, it will cease.
Mere mortals deaf to their feelings,
How can we say, we are civilized beings?
Minor distance? We'll use a car.
Would it be ok? If we go far.
When we turn blind to these things,
How can we say, we are civilized beings?
Animals killed for our food.
For each life, I don't feel good.
Day by day, the numbers are decreasing,
How can we say, we are civilized beings?
It is us killing biodiversity.
For the next to face adversity.
If we cannot change our wrong doings,
How can we say, we are civilized beings?
Sunday, 2 May 2021
बापु से ही भारत आज जिंदाबाद है
आज शान से हम रहते है।
अपना सिना तान के हम चलते है।
वो आज़ादी की लड़ाई वाला दिन हमें याद है।
बापु से ही भारत आज जिंदाबाद है
दुनियाँ में भारत की एक अच्छी पहचान है।
इस आज़ादी के लिए कईयों ने दी बलिदान है।
आज गर्व से दिल बोलता, भारत जिंदाबाद है।
बापु से ही भारत आज जिंदाबाद है।
कुछ ना कुछ बात होती है
कुछ ना कुछ बात होती है
शहर में भी धोबी घाट होती है।
कड़ी धूप में भी बरसात होती है।
हर एक कवि की कविता में,
कुछ ना कुछ बात होती है।
एक ही दुनियाँ में कहीं दिन तो कहीं रात होती है।
कोई दु:ख झेलता तो किसी के ऊपर खुशियों की बरसात होती है।
कहीं कुछ हो या ना हो, पर हर कवि के अन्दर।
कुछ ना कुछ बात होती है।
राजनीति में तो हमेशा धर्म और जात होती है।
चुनाव में सिर्फ और सिर्फ बात होती है।
नेता कुछ करें या ना करें लेकिन हर कवि के अन्दर,
कुछ ना कुछ बात होती है।
जीवन की पढ़ाई माता-पिता से ही शुरुआत होती है।
हमारे शिक्षक ही हमारे क़लम की दवात होती है।
शिक्षकों की डांंट और बात सुनकर बनते है हम कवि,
और हमारे अन्दर भी कुछ ना कुछ बात होती है।
मरने के बाद हमारी जगह श्मशान घाट होती है।
गुलाब के फूलों में हमेशा काँटे होती है।
हमेशा गमकने के लिए एक कवि में,
कुछ ना कुछ बात होती है।
Saturday, 24 April 2021
2sd anthology
Friday, 12 March 2021
Holi 2021
खुशियों की रंग है होली।
परिवार का संग है होली।
कुछ नया करने की ....
एक जोश और उमंग है होली।
उस अबीर में छिपा प्यार को पहचानों।
एक-एक रंगों को तुम सही ढंग से जानो।
ये हमारे पूर्वजों की देन है,
इसे तुम भूल मत जाना यारों।
ये रंगों का त्योहार है,
इसे तुम भूल मत जाना।
गर कोई रंग लगाये,
तो तुम फुल मत जाना।
Saturday, 20 February 2021
Acknowledgement
I would like to express my special thanks of gratitude to all my co-author send team members who helped me to publish this anthology. Without your hard work, love and support, it would not be possible to publish the book.
We are thankful flairs and glairs Publication, without whom, this project would never have been possible. Moreover a special thanks to our beloved parents, relatives and friends for their continuous support and encouragement towards us in completing this book.
Once again thanks to all my co-authors for being a part of this anthology and also for believing and helping me to publish this anthology.
स्वीकृतिमैं अपने सभी सह-लेखकों को आभार व्यक्त करने के लिए अपना विशेष धन्यवाद व्यक्त करना चाहता हूं जिन्होंने मुझे इस काव्य संग्रह पुस्तक को प्रकाशित करने में मदद की। आपकी मेहनत, प्यार और समर्थन के बिना यह पुस्तक प्रकाशित करना असंभव था। पर आप सभी के सहयोग से संभव हो सका।मैं प्रियंका मंहत जी को तहदिल से धन्यबाद करता हुँ जिन्होंने मुझे हमेंशा अपना प्यार और समर्थन दिया। इस पुस्तक में भी उनका बहुत बड़ा योगदान रहा हैं।हम Flairs and Glairs Publication को भी आभार व्यक्त करतें है, जिनके सहयोग से ही हमारा मेहनत सफल हुआ। इसके अलावा हमारे प्यारे माता-पिता, रिश्तेदारों और दोस्तों को इस पुस्तक को पूरा करने में हमारे निरंतर समर्थन और प्रोत्साहन के लिए विशेष धन्यवाद।एक बार फिर मेरे सभी सह-लेखकों को इस काव्य संग्रह पुस्तक का हिस्सा बनने के लिए धन्यवाद करता हूंं।
Tuesday, 16 February 2021
My bio
श्री निरज यादव (लेखक व कवि)का जन्म बिहार राज्य के पूर्वी चम्पारण जिले के भोपतपुर नयकाटोला गाँव में हुआ है। उनके पिता का नाम “श्री दीनानाथ प्रसाद यादव” और माता का नाम “श्रीमती चिंता देवी” है।
निरज हमेशा कहते है कि - “लिखना एक ऐसी कला है जिससे हम अपने मित्र को परम मित्र बना सकते है और अपने दुश्मन के दिल में एक अच्छा चित्र बना सकते है।”
इनकी रचनाएँ अमर उजाला अख़बार में छ्पी है। इनकी कविताएँ चेतना मसीही पत्रिका में छपती चली आ रही है। इनके द्वारा प्रकाशित पुस्तक के नाम है- “कविताएँ कोरोना काल की।”
“हमारी क़लम - हमारी ताक़त” नामक पुस्तक के संकलनकर्ता रह चुके हैं।
इनसे जुड़े रहने के लिए, इनको फॉलो करें
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Twitter ID : @YadavAuthor
Facebook : @nirajyadav
YouTube : Author Niraj Yadav
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Mr. Author Niraj Yadav was born in Bhopatpur Nayakatola, Motihari:Bihar. His father's name is Shri Dinanath Prasad Yadav and mother's name is Shrimati Chinta Devi.
His writings has been published in Amar Ujala, a national Hindi newspaper. He is writing for an international Hindi magazine (Chetna) since Jan, 2021.
He has successfully published his first Hindi poetry book on the pandemic Corona Virus named “Kavitayen Corona Kaal Ki".
He has been successfully compiled his first book with the title “Hamari Kalam-Hamari Taakat".
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Friday, 5 February 2021
जो बीतना था सो बीत गया,
अब तो पढ़ाई पर ध्यान लगाले।
कुछ वक्त और बचा है,
तु जोर से छलांग लगाले।
हाथ-पर-हाथ रखें,
निर्भर मत हो अपने तक़दीर पर।
उठ, मेहनत कर, और
मत बैठाकर हमेशा मन्दिर पर।
कड़ी मेहनत और लग्न से,
तु अपना किस्मत सँवार ले।
कुछ वक्त और बचा है,
तु जोर से छलांग लगाले।
सब तुम पर आश लगायें बैठे है,
‘तु सफल होगा' इसका विश्वास दिलादे।
कुछ वक्त और बचा है,
तु जोर से छलांग लगाले।
Wednesday, 23 December 2020
हमारा गाँव
चारों ओर हरियाली है,
हे प्रभु यह तेरी महिमा निराली है।
खेतों मे सरसों के फुल खिल रहे हैं,
मानो आपस मे गले मिल रहे हैं।
कहीं रहड़, मुँग तो कहीं खेसारी है,
यहाँ के बच्चें बहुत आज्ञाकारी हैं।
यहाँ कोयल की मधुर आवाज़ सुनाई देती है,
यहाँ हर घर मे डलियाँ बनाई जाती है।
गाय के गोबर से आँँगन की लिपाई होती है,
उस आँगन में तुलसी की पूजा होती है।
वह आँगन स्वर्ग - सा बन जाता है,
उस आँगन मे देवी - देवता का वास हो जाता है।
इस पवित्र मिट्टी को तुम छोड़कर मत जाना,
जाना तो जाना लेकिन तुम लौटकर जरूर आना।
इस गाँव में बढ़े-बुजुर्ग रहते हैं,
ख़ुद से ज्यादा दुसरों के लिए जीते हैं।
इनके जैसा ना मिलेगा कोई और कहीं,
सुख और आनंद तुम्हें सब मिलेगा यहीं
चाहें जहाँ भी हम रहें,
अपने गाँव को याद करते रहें।
हमारा गाँव हमारी पहचान है,
जन्म लिये है जहांं वो मांं समान हैं।
जो अपने गाँव को भुला देता है।
मानो वो अपने माँ को रूला देता है।
Tuesday, 15 December 2020
आओ मिलकर हम बनाये, एक छोटा- सा संसार।
एक छोटा-सा संसार
Published
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमें प्रेम की खुशबू गमके,
जिसमें हो खुशियों की बहार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमें गाछ-वृक्ष काटी ना जाए,
ना हो कभी पशु-पक्षियों पर प्रहार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमें गंदगी की ना हो नामो-निशान,
जिसमें करें हम सफाई बार-बार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमें मिल सके सबको न्याय,
ना हो कभी यहाँ भ्रष्टाचार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
सुबह-सुबह उठकर ना खेले कोई पब्जी,
पो फटते ही सभी करें सूर्य नमस्कार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमें नारी घूम सके खुले आम,
ना हो कभी उनका बलात्कार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमें कोई खाली ना बैठे,
सबको मिले रोजगार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा- सा संसार।
जिसमें सभी की चाल-ढाल अच्छा हो,
हो उनका एक अच्छा व्यवहार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा- सा संसार।
जिसमें सभी को सब पसंद हो,
हो एक दुजे पर प्यार-दुलार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जहाँ कभी कोई काम ना हो उलटा-फुलटा,
सभी चले वहां नियम के अनुसार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जहांं हर कोई एक ही चीज़ मे व्यस्थ हो,
सभी करें अपने अन्दर की बुराई को उत्सार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जहाँ बच्चों को महत्व दिया जाये,
बने बच्चों के लिए एक अच्छा चटसार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जहाँ सबके दिलों में दया हो,
सभी प्रकृति से करें प्यार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जहाँ सब अपने आस-पास के चीजों का करें प्रयोग,
बढ़ते रहें अपने सफलता की ओर जैसा बढ़ता विजयसार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जहाँ किसी को खमंड या अभिमान न हो,
बड़े-से-बड़े सफलता पर भी किसी को ना हो अहंकार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जहाँ पवित्रता की हमेशा बात हो,
और शुद्ध हों सबके विचार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
अगर चुनाव की बात हो,
तो चुना जाए सही उम्मीदवार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
चाहे निर्धन हो या धनवान,
जो भी हमारे पास हो करें हम स्वीकार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जो वीर वतन के लिए हुए शहीद,
करें उनकी शव को श्रृंगार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
शिक्षा नीति में हो बदलाव,
और शिक्षा में सबसे आगे हो बिहार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमें हिंसावाद की बातें ना हो,
ना बंदूक, ना ही हो तलवार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमें हम उच्च शिक्षा प्राप्त करें,
और शिक्षा ही हो हमारा हथियार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
सच्चे दिल से कोई वस्तु बेची जाए,
ना हो कोई काला बाजार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमे सब सही राह पर चलें,
जिसमे हो ना कोई अपराध, ना हो कोई गुनहगार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमे कोई किसी की ना करें गुलामी,
सभी हो अपने हक के हक़दार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमें सबका हौसला बुलंद हो,
गिरकर भी कोई ना माने हार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमें बच्चों को सदाचार सिखाये जाए,
और सभी के अंदर हो एक अच्छा संस्कार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिसमें सबको एक ही जैसा सम्मान मिले,
कोई ना करें जानवरों का शिकार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
किसी को भुखे पेट ही सोना पड़े,
इतना भी कोई ना हो लाचार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
भले बोले हम अलग-अलग भाषा,
पर एक ही हो परिवार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
भले हमारी जात-धर्म अलग-अलग हो,
लेकिन हमारे बीच कभी खड़े ना हो दीवार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
उसमे गरीबों को सम्मान मिलेगा,
नही लगेगी कभी राज दरबार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
इस सुन्दर - सी बगीचे मे,
खिलेंगे फुल अनेक प्रकार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
वहाँ हर एक का महत्व होगा,
कोई नही होगा बेकार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
वहाँ एकता को बल दिया जायेगा,
सब मिलकर मनाएंगे सबका त्योहार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
अब तो तुम छोड़ दो इस भ्रष्टाचार दुनिया को,
चलो अपना एक नया दुनिया बनाए मेरे यार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
सफलता की ओर बढ़ता चल,
रूकना मत, चलते रहो लगातार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
अगर तुम्हें अपने-आप पर विश्वास है,
तो हौसला रखना बरकरार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
वक्त नही लगेगा हमारे सपने,
अब जल्द हो जायेंगे साकार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
हमे किसी महबूब की यादों में,
खो नही जाना है, रहना है तैयार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
हमेशा सुकून और शांति,
यही रहे जीने का एक आधार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
कोई वहाँ मुर्ख नहीं होगा,
सब होंगे होशियार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
सबका दिल वहाँ साफ होगा,
होंगे हम बड़े दिलदार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
यह सुन्दर-सी संसार बनाने में,
तुम भी बनो हिस्सेदार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जो मिलेगा सो मिलेगा,
नही करेंगे हम इन्कार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
बच्चों को पढ़ा-लिखाकर,
बनाएंगे हम होनहार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
हम फुलों को तोड़ के क्यों दुख देते है?
अब नही बनाएंगे हम पुष्प हार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
कोई सुन्दर महबूब नही,
वातावरण से हो प्यार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
अगर आप सभी का साथ हो,
तो यह संघर्ष भी हो जायेगी पार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
अगर हम असफल होते है,
तो कोशिश करेंगे बार - बार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
जिंदगी दो पल की है,
बोल दो मिठ्ठे शब्द दो - चार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
अपने अंदर एक छोटा-सा संस्कार लायेंगे,
बड़े-बुजुर्गों को करेंगे हम नमस्कार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
निर्भया के गुनहगारों के साथ जो किया गया,
वही होगा सबके साथ, जो करेगा बलात्कार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
ऐसा सुन्दर संसार को देखने के लिए,
अब हमारा दिल है बेकरार।
आओ मिलकर हम बनायें,
एक छोटा-सा संसार।
Sunday, 13 December 2020
नया साल - 2021 शायरी
नई साल, नई शुरूआत होगी।
पुराने साल की यादगार रात होगी।
और कैसे प्रवेश करें हम नये साल में,
बस यही सब बात होगी।
पापा, आप ही हो सबसे महान।
क्यों मुझे बिठाये हो छाँव में?
जबकि छाले पड़े है आपके पाँव में
आपने इतना मुझे क्यों दिया है सुख?
कि झेलना पड़ा आपको दुख।
पापा, आपने हर मेरी ख्वाहिशों को पूरा किया।
अपनी ख्वाहिशों को आपने क्यों अधूरा किया?
अपने -आपको गिराकर, मुझे सिखाया जिंदगी का उड़ान,
पापा, आप ही हो सबसे महान।
आपने ऊँगली पकड़कर चलाना सिखाया है,
अपने ही तो मुझे सही राह दिखाया है ।
मैं प्रयत्न करूँगा कि दे सकुँ जीवन भर सम्मान,
पापा, आप ही हो सबसे महान।
पापा, से ही मेरा जीवन पूरा होता है,
पापा ना हो तो परिवार अधूरा होता है।
पापा आप है तो समाज मे मेरा भी होता है सम्मान,
पापा, तुम ही हो सबसे महान।
Thursday, 10 December 2020
असली जीत का मजा
जब जीत आसानी से मिल जाए,
तो जितने की अहसास नहीं होता है।
हमें जितना भी है, लेकिन कठिनाइयों से गुजर के,
वरना वह जीत कुछ खाश नहीं होता है।
- कवि निरज यादव
Submitted in anthology (BEJUBAN ISHQ)
Monday, 2 November 2020
Motivational शायरी
सफलता की राह पर,
सब कोई गिरता है।
चले जो तुरंत उठकर,
अंत मे वही जितता है।
- कवि निरज यादव
(Published in Amar Ujala)
Submitted for anthology
Thursday, 29 October 2020
शायरी✍️✍️✍️🙏🙏 माता - पिता
जिसनें हमें जीवन दिया,
पूरी जिंदगी हमारे लिए चिंतन किया।
आखिर उन्हें हम क्यों भूला रहें है ?
जबकि भगवान हमारे पास ही है, तो किसको हम बूला रहे हैं?
- कवि निरज यादव
Submitted for anthology
शायरी✍️✍️✍️✍️
ये देश - देश की बात है।
भरी रोशनी मे भी रात है।
शायरी✍️✍️✍️
जो आमने - सामने से जवाब दें, ऐसा जुबान चाहिए।
जो 24 घण्टें सिमा पर डटे रहें, ऐसा जवान चाहिए।
करें ना कभी जो आपस मे लड़ाई,
सबके बीच एकता हो, वैसा हिन्दूस्तान चाहिए।
Sunday, 25 October 2020
माँ से ही दुनियाँ महान होती है।
माँ ही हमारी ज्ञान की ज्योती है।
माँ ही है सबसे सर्वश्रेष्ठ,
माँ से ही दुनियाँ महान होती है।
माँ बिना पूरा जहान रोती है।
माँ को छोड़कर मंदिरों मे क्यो पूजा-पाठ होती?
माँ कोई देवियों से कम नहीं,
तो माँ हमेशा क्यों अपमान होती है?
माँ से ही निशा और बिहान होती है।
माँ से ही हमारी जिंदगी मे उड़ान होती है।
माँ सब कुछ है हमारे लिए,
माँ से ही दुनियाँ महान होती है।
माँ से ही हमारी पहचान होती है।
हमारी सफलता मे माँ की योगदान होती हैं।
माँ से ही तो हम सब कुछ सिखते हैं,
हिन्दी से प्यार किजिये
Wednesday, 21 October 2020
शायरी
Sunday, 18 October 2020
हमारे शिक्षक
पूरे साल भर मेहनत करते,
मन लगाकर पढ़ाते हमे।
जो ना समझ में आये हमको,
दोबारा समझाते हमे।
परीक्षा में अच्छा परिणाम आये,
इसके लिए जी - जान वो लगा देते हैं।
चाहे जितना भी मूर्ख हों हम ,
अपने परिश्नम से सफल बना देते हैं।
जब ग़लत राह पर चलते हम,
सही राह वो बताते हैं।
जो आँँधी में भी जलकर रोशनी फैलाये,
वैसा दीप बनाते हमे।
समाज के जाति - धर्म का भेद - भाव,
मिटाने को सिखाते हमे।
सभी धर्मों का आदर सम्मान,
करने को सिखाते हमे।
हमारे महान शिक्षकों को,
मेरा कर जोड़कर प्रणाम है।
मेरी यह छोटी - सी रचना,
उनके लिए एक सम्मान है।
(Submitted to HTW)
वही सबसे बड़ा महान है
माँ हमारी भगवान है।
माँ ही हमारी बाइबिल, गीता और कुरान है।
जो सच्ची सेवा करे उनकी,
वही सबसे बड़ा महान है।
माँ ही हमारी पहली भूगोल, गणित और विज्ञान है।
हम तारे बनकर चमकते हैं जिनमें, माँ वो आसमान है।
जो माँ की चरण हमेशा स्पर्श करे,
वही सबसे बड़ा महान है।
माँ हमारी छोटी-सी दिल मे पूरा जहान है।
माँ ही हमारी निशा और बिहान है।
जो माँ को अपने दिल मे बसा ले,
वही सबसे बड़ा महान है।
माँ ही तो हमारे लिए, क़ीमती वरदान है।
माँ की सेवा करना यही तो सबसे बड़ा ज्ञान है।
जो माँ को हमेशा खुश रखे,
वही सबसे बड़ा महान है।
(Submitted to HTW)
शायरी
यूँ तो करते हो कईयों से प्यार।
अपने देश से भी प्रेम करो मेरे यार।
भले जाते हो शहर, तुम जाओं,
लेकिन भुल मत जाना अपने घर - द्वार।
- निरज यादव
मेरे द्वारा रचित पुस्तक अब Amazon पर उपलब्ध हैं
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“Niraj and Dolly” poetry world
Friday, 9 October 2020
नागालैण्ड
Nitu Kumari
Thursday, 1 October 2020
जय बापू - जय बापू - जय बापू हमारे
जय बापू , जय बापू , जय बापू हमारे (2)
देश को आजा़द किये और हमारे जिंदगी को सँवारे (2)
💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥
भारत मे ही आते बापू , आपने अंग्रेजी भेष उतारी (2)
धोती को अपनाया आपने , चम्पारण सत्याग्रह के लिए गए मोतिहारी (2)
जय बापू , जय बापू , जय बापू हमारे ।
देश को आजा़द किये और हमारे जिंदगी को सँवारे ।
💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥
समुंदर मे डुबते नाव को किये आपने किनारे (2)
तुम ही हो दुलारे - प्यारे , राष्ट्र - पिता हमारे (2)
जय बापू , जय बापू , जय बापू हमारे ।
देश को आजा़द किये और हमारे जिंदगी को सँवारे ।
देश को आजा़द किये और हमारे जिंदगी को सँवारे ।
देश को आजा़द किये और हमारे जिंदगी को सँवारे ।
देश को आजा़द किये और हमारे जिंदगी को सँवारे (2)
Saturday, 26 September 2020
बिहार की चुनाव
पुरे पाँच साल भर नेता जी,
अपना मुँह दिखलाते नहीं।
किये हुए वादे कभी भी,
चाह कर भी निभाते नहीं।
चुनाव के वक्त पर नेता जी,
वोट माँगने आ जाते है।
गरीबों को गले लगाकर,
अपनी बातों में बहलाते है।
गाँव - गाँव मे घुमकर नेता जी,
बड़े - बड़े वादे कर देते है।
भोली - भाली जनता को बहलाकर,
उनसे वोट ले लेते है।
जब वे जीत जाते है,
आश लगयी बैठी जनता।
खुशी के गीत गाते है।
तब बुरी व्यवहार करते उनकी प्रवक्ता।
इसीलिए सोच - समझकर,
वोट हमे देनी चाहिए।
जो हमारे सपनों की करें कदर।
उनको ही चुनाव मे जितानी चाहिए ।
-- निरज यादव
Published in Anthology
💥💥💥💥💥💥
यह कविता 2020 मे बिहार में हो रही चुनाव के उपर लिखी है।मै चाहता हुँ कि बिहार की जनता एक अच्छे नेता को मुख्यमंत्री बनाये। अगर आपको यह कविता अच्छी लगी हो तो सभी को शेयर जरूर करें।
मेरे द्वारा रचित कविताएँ पढ़ने के लिए मेरे blog page पर आकर पढ़ सकते है और अच्छी लगे तो कॉमेंट जरूर किजियेगा।
अब से मै हर रविवार को एक कविता पोस्त करूंगा।
मेरा परिचय:
मै बिहार के मोतिहारी जिले के नयकाटोला गाँव से हुँ। मै एक पुस्तक का लेखक भी हो चुका हुँ।
मेरा पुस्तक का नाम है “कविताएँ कोरोना काल की" इस पुस्तक को आप जरूर पढ़े। यह Amazon पर उपलब्ध हैं। और Reviews देना मत भुलियेगा।
मुझ से आप Instagram पर भी जुड़ सकते हैं
मेरा Instagram ID हैं @authornirajyadav
https://www.amazon.in/dp/B08FQRZ94C/ref=cm_sw_r_cp_apa_V8sGFb4W680A4
Thursday, 24 September 2020
My thought-2
📜📜📜📜📜📜📜📜 भगवान हमेशा ही हमारे साथ रहते है,
बल्कि हमे अपना साथ कभी नहीं छोड़नी चाहिएं।
🖋️निरज यादव
📜📜📜📜📜📜📜📜
मेरी अन्य भी कविताएँ पढ़े......
- समय
- लॉकडाउन मे गाँँव हमें बुला रही
- My thought in english.
मेरे द्वारा रचित पुस्तक को जरूर पढ़े...
“कविताएँ कोरोना काल की”
Wednesday, 23 September 2020
My thought
💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
Proudness is must but over proud will always bring to the ground
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙
Saturday, 19 September 2020
समय
गमछा
इस गमछे की एहमियत हमें बचाये रखना है। दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न रहे? गमछा सदा लगाये रखना है।
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समय का सम्मान करो, वरना दु:ख भरी गीत गाते रहोगे। समय से पहले अपना काम करो, वरना तुम पछता...
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💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙💙 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 Proudness is must but over proud will always bring to the ground ...
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